माए नक की कहानी 19वीं शताब्दी के मध्य में स्थित है, जब राजा मोंगकुट का शासन था। यह एक युवा और सुंदर महिला नक की कहानी है, जो अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही थी। उसका पति मक एक सीमा युद्ध में लड़ने के लिए मजबूरी से भर्ती हो गया था, जिससे नक अकेली रह गई।

नक की मृत्यु प्रसव के दौरान हो गई, और उसका बच्चा भी नहीं बचा। लेकिन नक का प्रेम इतना मजबूत था कि उसकी आत्मा ने अगले जीवन में जाने से इनकार कर दिया। जब मक युद्ध से लौटा, तो उसने नक और अपने बच्चे को घर में इंतजार करते पाया।

वे दोनों कई हफ्तों तक साथ रहे, लेकिन नक की आत्मा ने पड़ोसियों को डराने और मारने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग किया। एक दिन, नक ने अपना हाथ अनोखे तरीके से बढ़ाया, जिससे मक को सच्चाई का पता चल गया। वह भाग गया और एक मंदिर में शरण ली, जहां नक की आत्मा नहीं जा सकती थी।

आज, माए नक का मंदिर एक तीर्थ स्थल है, जहां लोग प्रार्थना करते हैं और सुरक्षित प्रसव के लिए आशा रखते हैं। माए नक एक भूत नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म के अनुसार जुड़ाव का प्रतीक है, जो प्रेम को एक खतरनाक कैद में बदल सकता है।